Thursday, December 25, 2025

अटल जी केवल राजनेता नहीं, वे भारत-आत्मा की अभिव्यक्ति थे

Remembering A Leader and A Poet Atal Bihari Vajpayee Details in Haryana Screen 25th Dec. 2025

अटल स्मृति संकल्प संभार मुखपत्र का विमोचन भी किया

*पूर्व प्रधानमंत्री स्वर्गीय श्री अटल बिहारी वाजपेयी  की जयंती कार्यक्रम में मुख्यमंत्री ने की शिरकत

*प्रसिद्ध कवि डॉ. कुमार विश्वास भी रहे उपस्थित


चंडीगढ़
: 25 दिसम्बर 2025:
 (मीडिया लिंक 32//हरियाणा स्क्रीन डेस्क)::

माननीय अटल बिहारी को आज भी बहुत ही स्नेह और सम्मान से याद किया जाता है। हरियाणा के मुख्यमंत्री श्री नायब सिंह सैनी ने कहा कि पूर्व प्रधानमंत्री स्वर्गीय श्री अटल बिहारी वाजपेयी जी केवल एक राजनेता नहीं थे,  वे भारत की आत्मा की अभिव्यक्ति थे। उनके शब्दों में राष्ट्र बोलता था। उनकी वाणी में लोकतंत्र सांस लेता था और उनके विचारों में भारत का भविष्य आकार लेता था। वे ऐसे प्रधानमंत्री थे, जिन्होंने राजनीति को कविता से जोड़ा, सत्ता को संवेदना से जोड़ा और राष्ट्रनीति को मानवीय मूल्यों से समृद्ध किया।

मुख्यमंत्री वीरवार को देर सांय पुलिस ऑडिटोरियम अम्बाला शहर के सभागार में भारत रत्न, पूर्व प्रधानमंत्री स्वर्गीय श्री अटल बिहारी वाजपेयी जी की जयंती के अवसर पर आयोजित एक विशेष कार्यक्रम  में उपस्थित श्रोताओं को बतौर मुख्य अतिथि सम्बोधित कर रहे थे। इस कार्यक्रम के मुख्य वक्ता प्रसिद्ध कवि डॉ. कुमार विश्वास थे तथा कार्यक्रम के संयोजक एवं अध्यक्षता पूर्व मंत्री असीम गोयल नन्यौला ने की।

मुख्यमंत्री ने कार्यक्रम में पूर्व प्रधानमंत्री स्वर्गीय श्री अटल बिहारी वाजपेयी जी के चित्र पर पुष्प अर्पित कर उन्हें नमन किया गया। इस मौके पर मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी, डॉ कुमार विश्वास, असीम गोयल ने अटल स्मृति संकल्प संभार मुखपत्र का विमोचन भी किया। मुख्यमंत्री ने बताया कि इस स्मृति संकल्प के अंतर्गत प्रदेश भर में अटल जी को समर्पित सौ कार्यक्रम आयोजित किये जायेंगे ।

इस अवसर पर बोलते हुए मुख्यमंत्री श्री नायब सिंह सैनी ने कहा कि आज उन्हें अंबाला की इस पुण्य धरा पर आप सभी के बीच उपस्थित होकर अत्यंत गर्व, संतोष और भावनात्मक ऊर्जा का अनुभव हो रहा है। आज का यह अवसर केवल एक सांस्कृतिक आयोजन नहीं है, बल्कि यह राष्ट्र की चेतना, विचार और संवेदना को नमन करने का महापर्व है।

आज हम सब भारत रत्न, युगद्रष्टा, कवि-हृदय राजनेता, पूर्व प्रधानमंत्री स्वर्गीय श्री अटल बिहारी वाजपेयी जी की जयंती के अवसर पर उनके विचारों, उनके शब्दों और उनके आदर्शों को स्मरण करने के लिए एकत्रित हुए हैं। 

उन्होंने कहा कि आज ही महान स्वतंत्रता सेनानी और काशी हिन्दू विश्वविद्यालय के प्रणेता  महामना पंडित मदन मोहन मालवीय जी का भी जन्मदिन है। उन्होंने अपना पूरा जीवन समाज सुधार, मातृ भाषा और भारत माता की सेवा में समर्पित कर दिया।

मुख्यमंत्री श्री नायब सिंह सैनी ने प्रसिद्ध कवि डॉ. कुमार विश्वास जी का स्वागत करते हुए कहा कि कवि कुमार विश्वास वे कवि हैं जिन्होने पूर्व प्रधानमंत्री स्वर्गीय श्री अटल बिहारी वाजपेयी जी के सामने भी कविताएं प्रस्तुत कर उनका आशीर्वाद प्राप्त किया था। उन्होंने कहा कि आपकी कविताओं में राष्ट्र के प्रति समर्पण है। समाज के प्रति संवेदना है और युवा मन के सपनों की उड़ान है। उन्होने कहा कि मैं विश्वास करता हूं कि आज की यह काव्य संध्या केवल मनोरंजन नहीं करेगी, बल्कि आत्ममंथन का अवसर भी बनेगी। साथ ही, आदरणीय अटल जी के विचारों को नई पीढ़ी तक पहुंचाने का सशक्त माध्यम बनेगी।

मुख्यमंत्री ने कहा कि आज हम  अटल जी के जन्मदिन को सुशासन दिवस के रूप में मना रहे हैं। इसी उपलक्ष में बुधवार को  केंद्रीय गृहमंत्री श्री अमित शाह  ने अपने कर-कमलों से पंचकुला में उनकी प्रतिमा का अनावरण किया है। साथ ही, उनके जीवन पर आधारित कॉफी टेबल बुक का विमोचन और रक्तदान शिविर का उद्घाटन करके उन्हें सच्ची श्रद्धाजंलि दी। उन्होंने उनकी याद में प्रदेश के विभिन्न गांवों में 250 अटल पुस्तकालयों का उद्घाटन भी किया।

श्री नायब सिंह सैनी ने कहा कि अटल जी की सबसे बड़ी विशेषता यही थी कि वे विचारधारा के प्रति दृढ़ थे। लेकिन, संवाद के प्रति सदैव खुले थे। वे विरोधियों का भी सम्मान करते थे और असहमति को भी लोकतंत्र की शक्ति मानते थे।

आज जब हम उन्हें अपने अटल कहते हैं, तो यह केवल संबोधन नहीं, यह अपनेपन की अनुभूति है। अटल जी हर भारतवासी के अपने थे। उन्होंने कहा था कि ‘छोड़ो मत अपनी आन, कठिनाइयों में भी मत छोड़ो अपनी पहचान।’उनका यही संदेश आज भी भारत के युवाओं को संघर्ष और संकल्प का मार्ग दिखा रहा है।

उन्होंने कहा कि कविता समाज का दर्पण होती है। राष्ट्र की संवेदना होती है और समय का सत्य होती है। अटल जी स्वयं एक श्रेष्ठ कवि थे। उनकी कविताएं सत्ता के शिखर पर बैठकर भी आम जन के मन की पीड़ा को अभिव्यक्त करती थीं। उनकी रचनाओं में राष्ट्रवाद था, लेकिन वह मानवता से जुड़ा राष्ट्रवाद था।

मुख्यमंत्री जी ने कहा कि हरियाणा की भूमि वीरों, संतों और विद्वानों की भूमि रही है। यह वही धरती है जहां शौर्य भी है, श्रम भी है और साहित्य भी है। हमारी सरकार का यह स्पष्ट विश्वास है कि विकास केवल सडक़ों, इमारतों और परियोजनाओं से नहीं होता बल्कि विकास तब पूर्ण होता है जब समाज की चेतना जागृत हो, जब संस्कृति समृद्ध हो और जब विचारों की अभिव्यक्ति को सम्मान मिले। इसी सोच के साथ हम साहित्य, कला और संस्कृति को निरंतर प्रोत्साहन दे रहे हैं प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी के नेतृत्व में देश आज ‘सुशासन, विकास और सांस्कृतिक पुनर्जागरण’ के मार्ग पर आगे बढ़ रहा है।

यह वही मार्ग है, जिसकी नींव  अटल जी ने अपने कार्यकाल में रखी थी। चाहे वह राष्ट्रीय राजमार्गों का स्वर्णिम चतुर्भुज हो, परमाणु शक्ति के माध्यम से भारत की सामरिक क्षमता को सुदृढ़ करना हो या फिर वैश्विक मंच पर भारत की प्रतिष्ठा को नई ऊंचाइयों तक ले जाना हो, अटल जी के निर्णय आज भी भारत की प्रगति की आधारशिला बने हुए हैं। 

मुख्यमंत्री ने कहा कि आज का यह कार्यक्रम हमें यह भी स्मरण कराता है कि लोकतंत्र केवल शासन की व्यवस्था नहीं, बल्कि संवाद की संस्कृति है। कविता संवाद का सबसे सशक्त माध्यम है। जब शब्द दिल से निकलते हैं, तो वे दिल तक पहुंचते हैं। इस अवसर पर पूर्व मंत्री असीम गोयल नन्यौला ने मुख्यमंत्री  तथा कवि कुमार विश्वास को शॉल भेंट कर, पगड़ी पहनाकर व अटल जी का चित्र भेंट कर सम्मानित किया।

कार्यक्रम में प्रसिद्ध कवि डा. कुमार विश्वास ने अपनी काव्य रचनाओं के द्वारा  मुख्यमंत्री व हरियाणा सरकार की भूरि-भूरि प्रशंसा की। कुमार विश्वास ने  कहा कि अटल जी भी नायाब थे और मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी भी अटल हैं। उन्होंने  कहा कि मुख्यमंत्री बहुत सोम्य व मिलनसार हैं।

इस अवसर पर पूर्व मंत्री एवं कार्यक्रम संयोजक असीम गोयल नन्यौला ने मुख्यमंत्री श्री नायब सिंह सैनी एवं प्रसिद्ध कवि डा. कुमार विश्वास का मां अम्बा की धरती अम्बाला में स्वागत करते हुए कहा कि आज हम ऐसे महान व्यक्तित्व के धनी स्वर्गीय श्री अटल बिहारी वाजपेयी जी की 101वीं जयंती पर  एकत्रित हुए हैं। हमें सदैव स्वर्गीय श्री अटल बिहारी वाजपेयी जी के पदचिन्हो पर चलते हुए समाज एवं देश के विकास में अपना योगदान देना चाहिए।

कुल मिलाकर यह एक यादगारी आयोजन रहा। अटल जी की स्मृतियों को फिर से जीवंत बनाने वाले इस आयोजन ने उनका बहुत कुछ उन लोगों को भी याद दिलाया जिन्होंने अटल जी को नहीं देखा हुआ। 

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