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Thursday, March 19, 2020

22 मार्च को सुबह 7 बजे से रात 9 बजे तक होगा जनता कर्फ्यू

प्रविष्टि तिथि: 19 MAR 2020 8:57PM by PIB Delhi
कोरोना के कहर का सामना करने के लिए प्रधानमंत्री मोदी का गुर-मंत्र  
नई दिल्ली: 19 मार्च 2020: (पीआईबी//हरियाणा स्क्रीन)::
मेरे प्रिय देशवासियों,
पूरा विश्व इस समय संकट के बहुत बड़े गंभीर दौर से गुजर रहा है।
आम तौर पर कभी जब कोई प्राकृतिक संकट आता है तो वो कुछ देशों या राज्यों तक ही सीमित रहता है।
लेकिन इस बार ये संकट ऐसा है, जिसने विश्व भर में पूरी मानवजाति को संकट में डाल दिया है।
जब प्रथम विश्व युद्ध हुआ था, जब द्वितीय विश्व युद्ध हुआ था, तब भी इतने देश युद्ध से प्रभावित नहीं हुए थे,
जितने आज कोरोना से हैं।
पिछले दो महीने से हम निरंतर दुनिया भर से आ रहीं कोरोना वायरस से जुड़ी चिंताजनक खबरें देख रहे हैं,
सुन रहे हैं।
इन दो महीनों में भारत के 130 करोड़ नागरिकों ने कोरोना वैश्विक महामारी का डटकर मुकाबला किया है, आवश्यक सावधानियां बरती हैं।
लेकिन,
बीते कुछ दिनों से ऐसा भी लग रहा है जैसे हम संकट से बचे हुए हैं,
सब कुछ ठीक है।
वैश्विक महामारी कोरोना से निश्चिंत हो जाने की ये सोच सही नहीं है।
इसलिए,
प्रत्येक भारतवासी का सजग रहना,
सतर्क रहना बहुत आवश्यक है।
साथियों,
आपसे मैंने जब भी,
जो भी मांगा है,
मुझे कभी देशवासियों ने निराश नहीं किया है।
ये आपके आशीर्वाद की ताकत है कि हमारे प्रयास सफल होते हैं।।
आज,
मैं आप सभी देशवासियों से, आपसे,
कुछ मांगने आया हूं।
मुझे आपके आने वाले कुछ सप्ताह चाहिए,
आपका आने वाला कुछ समय चाहिए।
साथियों,
अभी तक विज्ञान,
कोरोना महामारी से बचने के लिए,
कोई निश्चित उपाय नहीं सुझा सका है और न ही इसकी कोई वैक्सीन बन पाई है।
ऐसी स्थिति में चिंता बढ़नी बहुत स्वाभाविक है।
दुनिया के जिन देशों में कोरोना वायरस का प्रभाव ज्यादा देखा जा रहा है,
वहां अध्ययन में एक और बात सामने आई है।
इन देशों में शुरुआती कुछ दिनों के बाद अचानक बीमारी का जैसे विस्फोट हुआ है।
इन देशों में कोरोना से संक्रमित लोगों की संख्या बहुत तेजी से बढ़ी है।
भारत सरकार इस स्थिति पर, कोरोना के फैलाव के इस ट्रैक रिकॉर्ड पर पूरी तरह नजर रखे हुए है।
हालांकि कुछ देश ऐसे हैं जिन्होंने तेजी से फैसले लेकर,
अपने यहां के लोगों को ज्यादा से ज्यादा Isolate करके स्थिति को सँभाला है।
भारत जैसे
130 करोड़ की आबादी वाले देश के सामने, विकास के लिए प्रयत्नशील देश के सामने,
कोरोना का ये बढ़ता संकट सामान्य बात नहीं है।
आज जब
बड़े-बड़े और विकसित देशों में हम कोरोना महामारी का व्यापक प्रभाव देख रहे हैं,
तो भारत पर इसका कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा,
ये मानना गलत है।
इसलिए,
इस वैश्विक महामारी का मुकाबला करने के लिए दो प्रमुख बातों की आवश्यकता है।
पहला- संकल्प
और
दूसरा- संयम।
आज 130 करोड़ देशवासियों को अपना संकल्प और दृढ़ करना होगा कि हम इस वैश्विक महामारी को रोकने के लिए एक नागरिक के नाते,
अपने कर्तव्य का पालन करेंगे,
केंद्र सरकार,
राज्य सरकारों के दिशा निर्देशों का पालन करेंगे।
आज हमें ये संकल्प लेना होगा कि हम स्वयं संक्रमित होने से बचेंगे और दूसरों को भी संक्रमित होने से बचाएंगे।
साथियों,
इस तरह की वैश्विक महामारी में, एक ही मंत्र काम करता है- “हम स्वस्थ तो जग स्वस्थ”।
ऐसी स्थिति में,
जब इस बीमारी की कोई दवा नहीं है,
तो हमारा खुद का स्वस्थ बने रहना बहुत आवश्यक है।
इस बीमारी से बचने और खुद के स्वस्थ बने रहने के लिए अनिवार्य है संयम।
और संयम का तरीका क्या है- भीड़ से बचना,
घर से बाहर निकलने से बचना।
आजकल जिसे Social Distancing कहा जा रहा है, कोरोना वैश्विक महामारी के इस दौर में,
ये बहुत ज्यादा आवश्यक है।
हमारा संकल्प और संयम, इस वैश्विक महामारी के प्रभावों को कम करने में बहुत बड़ी भूमिका निभाने वाला है।
और इसलिए,
अगर आपको लगता है कि आप ठीक हैं,
आपको कुछ नहीं होगा,
आप ऐसे ही मार्केट में घूमते रहेंगे,
सड़कों पर जाते रहेंगे,
और कोरोना से बचे रहेंगे,
तो ये सोच सही नहीं है।
ऐसा करके आप अपने साथ और अपने परिवार के साथ अन्याय करेंगे।
इसलिए मेरा सभी देशवासियों से ये आग्रह है कि आने वाले कुछ सप्ताह तक, 
जब बहुत जरूरी हो तभी अपने घर से बाहर निकलें।
जितना संभव हो सके,
आप अपना काम,
चाहे बिजनेस से जुड़ा हो,
ऑफिस से जुड़ा हो,
अपने घर से ही करें।
जो सरकारी सेवाओं में हैं, अस्पताल से जुड़े हैं,
जन-प्रतिनिधि हैं, जो मीडिया कर्मी हैं,
इनकी सक्रियता तो आवश्यक है लेकिन समाज के बाकी सभी लोगों को,
खुद को बाकी समाज से Isolate कर लेना चाहिए।
मेरा एक और आग्रह है कि हमारे परिवार में जो भी सीनियर सिटिजन्स हों,
65 वर्ष की आयु के ऊपर के व्यक्ति हों,
वो आने वाले कुछ सप्ताह तक घर से बाहर न निकलें।
आज की पीढ़ी इससे बहुत परिचित नहीं होगी,
लेकिन पुराने समय में जब युद्ध की स्थिति होती थी,
तो गाँव गाँव में
BlackOut किया जाता था। घरों के शीशों पर कागज़ लगाया जाता था, लाईट बंद कर दी जाती थी, लोग चौकी बनाकर पहरा देते थे |
ये कभी-कभी काफी लंबे समय तक चलता था। युद्ध ना भी हो तो भी बहुत सी जागरूक नगरपालिकाएं BlackOut की ड्रिल भी कराती थी।
साथियों,
मैं आज प्रत्येक देशवासी से एक और समर्थन मांग रहा हूं।
ये है जनता-कर्फ्यू।
जनता कर्फ्यू यानि जनता के लिए,
जनता द्वारा खुद पर लगाया गया कर्फ्यू।
इस रविवार,
यानि
22 मार्च को,
सुबह 7 बजे से रात
9 बजे तक, सभी देशवासियों को,
जनता-कर्फ्यू का पालन करना है।
इस दौरान हम न घरों से बाहर निकलेंगे, न सड़क पर जाएंगे, न मोहल्ले में कहीं जाएंगे।
सिर्फ आवश्यक सेवाओं से जुड़े लोग ही 22 मार्च को अपने घरों से बाहर निकलेंगे।
साथियों,
22 मार्च को हमारा ये प्रयास, हमारे आत्म-संयम,
देशहित में कर्तव्य पालन के संकल्प का एक प्रतीक होगा।
22 मार्च को जनता-कर्फ्यू की सफलता, इसके अनुभव, हमें आने वाली चुनौतियों के लिए भी तैयार करेंगे।
मैं देश की सभी राज्य सरकारों से भी आग्रह करूंगा कि वो
जनता-कर्फ्यू
का पालन कराने का नेतृत्व करें।
NCC,
NSS,
से जुड़े युवाओं,
देश के हर युवा,
सिविल सोसायटी,
हर प्रकार के संगठन,
इन सभी से भी अनुरोध करूंगा कि अभी से लेकर अगले दो दिन तक सभी को
जनता-कर्फ्यू
के बारे में जागरूक करें।
संभव हो तो हर व्यक्ति प्रतिदिन कम से कम
10 लोगों को फोन करके कोरोना वायरस से बचाव के उपायों के साथ ही जनता-कर्फ्यू के बारे में भी बताए।
साथियों,
ये जनता कर्फ्यू एक प्रकार से हमारे लिए,
भारत के लिए एक कसौटी की तरह होगा।
ये कोरोना जैसी वैश्विक महामारी के खिलाफ लड़ाई के लिए भारत कितना तैयार है, ये देखने और परखने का भी समय है।
आपके इन प्रयासों के बीच, जनता-कर्फ्यू के दिन,
22 मार्च को मैं आपसे एक और सहयोग चाहता हूं।
साथियों,
पिछले
2 महीनों से लाखों लोग, अस्पतालों में,
एयरपोर्ट्स पर,
दिन रात काम में जुटे हुए हैं।
चाहे
डॉक्टर हों,
नर्स हों,
हॉस्पिटल का स्टाफ हो,
सफाई करने वाले भाई-बहन हों,
एयरलाइंस के कर्मचारी हों, सरकारी कर्मचारी हों, पुलिसकर्मी हों,
मीडिया कर्मी हों,
रेलवे-बस-ऑटो रिक्शा की सुविधा से जुड़े लोग हों,
होम डिलिवरी करने वाले लोग हों,
ये लोग,
अपनी परवाह न करते हुए,
दूसरों की सेवा में लगे हुए हैं।
आज की परिस्थितियां देखें,
तो ये सेवाएं सामान्य नहीं कही जा सकती।
आज खुद इनके भी संक्रमित होने का पूरा खतरा है।
बावजूद इसके ये अपना कर्तव्य निभा रहे हैं,
दूसरों की सेवा कर रहे हैं।
ये राष्ट्र-रक्षक की तरह कोरोना महामारी और हमारे बीच में खड़े हैं।
देश इनका कृतज्ञ है।
मैं चाहता हूं कि
22 मार्च, रविवार के दिन हम ऐसे सभी लोगों को धन्यवाद अर्पित करें।
रविवार को ठीक
5 बजे,
हम अपने घर के दरवाजे पर खड़े होकर,
बाल्कनी में,
खिड़कियों के
सामने खड़े होकर
5 मिनट तक ऐसे लोगों का आभार व्यक्त करें।
ताली बजाकर,
थाली बजाकर या फिर घंटी बजाकर,
हम इनका हौसला बढ़ाएं, सैल्यूट करें।
पूरे देश के स्थानीय प्रशासन से भी मेरा आग्रह है कि
22 मार्च को
5 बजे,
सायरन की आवाज से इसकी सूचना लोगों तक पहुंचाएं।
सेवा परमो धर्म के हमारे संस्कारों को मानने वाले ऐसे देशवासियों के लिए हमें पूरी श्रद्धा के साथ अपने भाव व्यक्त करने होंगे।
साथियों,
संकट के इस समय में,
आपको ये भी ध्यान रखना है कि हमारी आवश्यक सेवाओं पर,
हमारे हॉस्पिटलों पर दबाव भी निरंतर बढ़ रहा है।
इसलिए मेरा आपसे आग्रह ये भी है कि रूटीन चेक-अप के लिए अस्पताल जाने से जितना बच सकते हैं,
उतना बचें।
आपको बहुत जरूरी लग रहा हो तो अपनी जान-पहचान वाले डॉक्टर,
आपके फैमिली डॉक्टर या अपनी रिश्तेदारी में जो डॉक्टर हों, उनसे फोन पर ही आवश्यक सलाह ले लें।
अगर आपने इलेक्टिव सर्जरी, जो बहुत आवश्यक न हो, ऐसी सर्जरी,
उसकी कोई डेट ले रखी है, तो मेरा आग्रह है कि इसे भी आगे बढ़वा दें,
एक महीना बाद की तारीख ले लें।
साथियों,
इस वैश्विक महामारी का अर्थव्यवस्था पर भी व्यापक प्रभाव पड़ रहा है।
कोरोना महामारी से उत्पन्न हो रही आर्थिक चुनौतियों को ध्यान में रखते हुए, वित्त मंत्री के नेतृत्व में सरकार ने एक
कोविड-19-Economic Response Task Force
के गठन का फैसला लिया है।
ये टास्क फोर्स सारे स्टेकहोल्डर्स से नियमित संपर्क में रहते हुए,
फीडबैक लेते हुए,
हर स्थिति का आकलन करते हुए निकट भविष्य में फैसले लेगी।
ये टास्क फोर्स,
ये भी सुनिश्चित करेगी कि, आर्थिक मुश्किलों को कम करने के लिए जितने भी कदम उठाए जाएं,
उन पर प्रभावी रूप से अमल हो।
निश्चित तौर पर ये महामारी ने देश के मध्यम वर्ग,
निम्न मध्यम वर्ग और गरीब के आर्थिक हितों को भी गहरी क्षति पहुंचा रही है।
संकट के इस समय में मेरा देश के व्यापारी जगत,
उच्च आय वर्ग से भी आग्रह है कि अगर संभव है तो आप
जिन-जिन लोगों से सेवाएं लेते हैं, उनके आर्थिक हितों का ध्यान रखें।
हो सकता है आने वाले कुछ दिनों में, ये लोग दफ्तर न आ पाएं, आपके घर न आ पाएं।
ऐसे में उनका वेतन न काटें, पूरी मानवीयता के साथ, संवेदनशीलता के साथ फैसला लें।
हमेशा याद रखिएगा,
उन्हें भी अपना परिवार चलाना है,
अपने परिवार को बीमारी से बचाना है।
मैं देशवासियों को इस बात के लिए भी आश्वस्त करता हूं कि देश में दूध,
खाने-पीने का सामान, दवाइयां,
जीवन के लिए ज़रूरी ऐसी आवश्यक चीज़ों की कमी ना हो इसके लिए तमाम कदम उठाए जा रहे हैं।
इसलिए मेरा सभी देशवासियों से ये आग्रह है कि ज़रूरी सामान संग्रह करने की होड़ न लगाएं।
आप सामान्य रूप से ही खरीदारी करें।
Panic Buying न करें।
साथियों,
पिछले दो महीनों में,
130 करोड़ भारतीयों ने,
देश के हर नागरिक ने,
देश के सामने आए इस संकट को अपना संकट माना है,
भारत के लिए,
समाज के लिए उससे जो बन पड़ा है,
उसने किया है।
मुझे भरोसा है कि आने वाले समय में भी आप अपने कर्तव्यों का,
अपने दायित्वों का इसी तरह निर्वहन करते रहेंगे।
हां, मैं मानता हूं कि ऐसे समय में कुछ कठिनाइयां भी आती हैं, आशंकाओं और अफवाहों का वातावरण भी पैदा होता है।
कई बार एक नागरिक के तौर पर हमारी अपेक्षाएं भी नहीं पूरी हो पातीं।
फिर भी, ये संकट इतना बड़ा है कि सारे देशवासियों को इन दिक्कतों के बीच,
दृढ़ संकल्प के साथ इन कठिनाइयों का मुकाबला करना ही होगा।
साथियों,
हमें अभी अपना सारा सामर्थ्य कोरोना से बचने में लगाना है।
आज देश में केंद्र सरकार हो, राज्य सरकारें हों,
स्थानीय निकाय हों,
पंचायतें हों, 
जन-प्रतिनिधि हों या फिर सिविल सोसायटी,
हर कोई अपने-अपने तरीके से इस वैश्विक महामारी से बचने में अपना योगदान दे रहा है।
आपको भी अपना पूरा योगदान देना है।
ये आवश्यक है कि वैश्विक महामारी के इस वातावरण में मानव जाति विजयी हो, भारत विजयी हो।
कुछ दिन में नवरात्रि का पर्व आ रहा है।
ये शक्ति उपासना का पर्व है।
भारत पूरी शक्ति के साथ आगे बढ़े, यही शुभकामना है।
बहुत-बहुत धन्यवाद !!!
*****
VRRK/AK  (रिलीज़ आईडी: 1607251) 
22 मार्च को सुबह 7 बजे से रात 9 बजे तक होगा जनता कर्फ्यू

Saturday, January 4, 2014

हरियाणा में राष्ट्रीय कैंसर संस्थान की स्थापना के लिए भी काम शुरू

03-जनवरी-2014 17:36 IST
प्रधानमंत्री ने हरियाणा में किया दो विशेष परियोजनायों का शुभारम्भ 
हरियाणा में विश्व परमाणु ऊर्जा सहभागिता केन्द्र और राष्ट्रीय कैंसर संस्थान की आधार शिला रखे जाने के उपलक्ष्य में आयोजित समारोह में प्रधानमंत्री का संबोधन 
प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह ने आज झज्जर, हरियाणा में विश्व परमाणु ऊर्जा सहभागिता केन्द्र और राष्ट्रीय कैंसर संस्थान की आधार शिला रखे जाने के उपलक्ष्य में आयोजित समारोह को सम्बोधित किया। उनके सम्बोधन का हिंदी पाठ नीचे दिया जा रहा है- 
प्रधानमंत्री डा मनमोहन सिंह जब 3 जनवरी 2014 को हरियाणा के बहादुरगढ़ हवाई अडडे पर पहुंचे तो वहां उन्हें सुस्वागतम कहने ले लिए हरियाणा के राज्यपाल जगन्नाथ पहाड़िया, केंद्रीय स्वास्थ्य व् परिवार भलाई मंत्री गुलाम नबी आज़ाद और हरियाणा के मुख्य मंत्री भूपेंद्र सिंह हुडडा भी विशेष तौर पर मौजूद रहे। (पत्र सूचना कार्यालय)
“आज हमने विश्व परमाणु ऊर्जा सहभागिता केन्द्र की स्थापना के लिए पहला कदम उठाया है। इससे हरियाणा को एक ऐसी संस्था मिलने जा रही है जो महफूज़ और टिकाऊ परमाणु ऊर्जा को बढ़ावा देने की दिशा में काम करेगी। इसके अलावा हमने राष्ट्रीय कैंसर संस्थान की स्थापना के लिए भी काम शुरू कर दिया है। यह संस्थान हरियाणा में अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान के परिसर की स्थापना की एक बड़ी परियोजना का हिस्सा होगा और देश में कैंसर की बीमारी से संबंधित खोज और उसके इलाज की सुविधाओं के लिए एक उत्कृष्टता केन्द्र के तौर पर काम करेगा। 

ये दोनों परियोजनाएं हमारे देश के लिए बहुत महत्व रखती हैं और मैं हरियाणा सरकार को, श्री भूपेन्दर सिंह हुड्डा और श्री दि‍पेन्‍दर सिंह हुड्डा को इन दोनों संस्थानों की स्थापना के लिए किए गए प्रयास और इस काम में भारत सरकार को दिए जा रहे सहयोग के लिए बधाई देना चाहता हूं। मैं हरियाणा सरकार और मुख्य मंत्री श्री भूपेन्दर सिंह हुड्डा जी को ख़ास तौर पर अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान के दूसरे परिसर के विकास के लिए 300 एकड़ ज़मीन उपलब्ध कराने के लिए धन्यवाद देना चाहता हूँ। ये परियोजनाएं न सिर्फ हमारे देश के लिए बल्कि पूरी दुनिया के लिए महत्वपूर्ण होंगी। इनकी स्थापना में हमें हरियाणा की जनता का पूरा सहयोग मिला है, जिसके लिए हम सब आपके आभारी हैं। 

जैसे-जैसे हमारे देश की आबादी बढ़ेगी, हमारे देश में शहरीकरण बढ़ेगा और हमारी आमदनी भी बढ़ेगी, हमारे देश में बिजली की मांग भी बढ़ेगी। हमें अपने देश के आर्थिक विकास के लिए बिजली की आपूर्ति को तेजी से बढ़ाना होगा। ऐसा करके ही हम अपने कारखानों, अपने किसानों के सिंचाई पम्पों और लोगों के घरों में रोशनी के लिए बिजली उपलब्ध करा सकेंगे। देश में उपलब्ध बिजली के सभी संसधानों यानी कोयला, पानी, गैस, सौर ऊर्जा और पवन ऊर्जा का इस्तेमाल करने के साथ-साथ हमें यह भी सुनिश्चित करना होगा कि हम प्रदूषण पर काबू पा लें जिससे हमारे वातावरण को कम से कम नुकसान पहुँचे। 

परमाणु ऊर्जा, बिजली बनाने का एक भरोसेमंद और साफ सुथरा ज़रिया है। भारत दुनिया के उन कुछ देशों में से एक है, जिन्होंने परमाणु ऊर्जा संयंत्र लगाने की प्रौद्योगिकी का विकास कर लिया है और परमाणु ईंधन बनाने की काबिलियत भी हासिल कर ली है। हमारा मकसद है कि आने वाले 10 सालों के अंदर हम 27000 मेगावाट से ज्यादा परमाणु ऊर्जा बनाने की क्षमता प्राप्त कर लें। 

परमाणु ऊर्जा बनाने की अपनी क्षमता बढ़ाने के साथ-साथ हमारे लिए यह भी जरूरी है कि वह सामग्री जिससे परमाणु ईंधन तैयार होता है, महफूज़ रहे और कभी-भी अपराधियों और आतंकवादियों जैसे गलत लोगों के हाथ न लग पाये। यह भी जरूरी है कि हमारे परमाणु ऊर्जा संयंत्र हिफाज़त के सबसे अच्छे तरीकों को अपनाएं। 

भारत में हमने परमाणु ऊर्जा संयंत्र और परमाणु सामग्री की हिफाज़त के लिए बेहतरीन तरीकों को अपनाया भी है। जापान में 2011 में फुकुशिमा के हादसे के बाद हमने अपने परमाणु संयंत्र के डिजाइन और प्रबंधन में सुरक्षा के कई नए उपाय किये हैं। आज हम यह बात पूरे इत्मीनान से कह सकते हैं कि हमारे सुरक्षा मानकों की तुलना दुनिया के सबसे अच्छे सुरक्षा मानकों से की जा सकती है। 

लेकिन हम परमाणु ऊर्जा संयंत्र और परमाणु सामग्री की सुरक्षा और भी मज़बूत करने की कोशिश करते रहेंगे। इससे अपनी ऊर्जा नीति पर हम आत्मविश्वास के साथ अमल करके आगे बढ़ पाएंगे। 

इस काम में विश्व परमाणु ऊर्जा सहभागिता केन्द्र की एक महत्वपूर्ण भूमिका रहेगी। यह पूरी तरह चालू हो जाने पर, ऐसी परमाणु प्रणालियों की खोज और डिजाइन के लिए काम करेगा जो सुरक्षित और टिकाऊ हों और जिनका गलत लोगों के हाथों में पड़ने का कोई खतरा न हो। यह परमाणु ऊर्जा के क्षेत्र में मानव संसाधनों के विकास के मकसद से भारतीय और अंतर्राष्ट्रीय विशेषज्ञों दोनों को शामिल करके कार्यशालाएं और संगोष्ठियां भी आयोजित करेगा। अंतर्राष्ट्रीय और भारतीय वैज्ञानिकों को एक साथ लाकर यह केन्द्र उनके लिए अनुसंधान और प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित करेगा और इस तरह से विश्व परमाणु ऊर्जा सहभागिता को बढ़ावा देगा। इन सब मकसदों को पूरा करने के लिए हम अंतर्राष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एंजेसी और रूस, फ्रांस और अमेरिका जैसे देशों के साथ मिलकर काम कर रहे हैं। 

मुझे खुशी है कि इस इलाके में रहने वाले लोगों को इस परियोजना से सीधा लाभ मिलेगा। इसके लिए जिन लोगों की जमीनें ली गई हैं उन्हें मुआवजे के अलावा 33 साल तक वार्षिक भुगतान मिलता रहेगा। इस तरह एक लंबे वक्त के लिए उन्हें आमदनी का ज़रिया उपलब्ध होगा। स्थानीय लोगों के फायदे के लिए इस केन्द्र के आसपास के क्षेत्र में 10 करोड़ रूपये की लागत से कई परियोजनाएं लागू की जाएंगी। इनमें लड़कियों के लिए एक कॉलेज, विशेष आवश्यकताओं वाले बच्चों के लिए एक स्कूल, भिंडवास पक्षी विहार का विकास, स्वास्थ्य सुविधाएं, खारे पानी को साफ करने की परियोजना और कंप्यूटर प्रशिक्षण की व्यवस्था भी शामिल है। 

इसके अलावा स्थानीय नौजवानों के लिए एक विशेष कार्यक्रम भी चलाया जाएगा जिसके ज़रिए उन्हें पानी, ऊर्जा और वातावरण जैसे बुनियादी क्षेत्रों में तकनीकी जानकारी मि‍ल सकेगी। 

परमाणु ऊर्जा विभाग ने इस परियोजना को लागू करने के लिए कड़ी मेहनत की है जिसके लिए मैं उनकी तारीफ करना चाहूंगा। परियोजना की कामयाबी के लिए मैं अपनी शुभकामनाएं भी देना चाहूंगा। 

अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान के झज्जर परिसर में जो राष्ट्रीय कैंसर संस्थान बनाया जाएगा वह स्वास्थ्य सेवा के क्षेत्र में भारत सरकार की सबसे बड़ी अकेली परियोजना होगी। इसे साढ़े तीन सालों में करीब 2000 करोड़ रुपए की लागत से लागू किया जाएगा। देश में कैन्सर रोग से संबंधित अनुसंधान के लिए यह एक बहुत बड़ा कदम साबित होगा और उत्तरी भारत में कैन्सर के इलाज में भी महत्वपूर्ण योगदान देगा। राष्ट्रीय कैंसर संस्थान में 710 बिस्तरों की सुविधा होगी और कुल मिलाकर 550 डॉक्टर और 2200 नर्स यहां काम कर पायेंगे। 

भारत में कैंसर, दिल की बीमारियां और मधुमेह जैसी बीमारियों का बोझ तेजी से बढ़ रहा है। इसके मद्देनजर कैंसर रोग से संबंधित अनुसंधान और उसके इलाज के लिए एक संस्थान की ज़रूरत शायद इससे ज्यादा पहले कभी नहीं रही। मैं अपने साथी श्री गुलाम नबी आज़ाद साहब को इस परियोजना को असलियत के इतना करीब लाने के लिए बहुत-बहुत मुबारकबाद देता हूं। साथ में, मैं अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान को भी इस परियोजना पर मेहनत से काम करने के लिए बधाई देता हूं। 

श्री गुलाम नबी आज़ाद के नेतृत्व में स्वास्थ्य के क्षेत्र में कई बड़ी परियोजनाएं शुरू की गई हैं। ये सब आम आदमी को सीधे तौर पर स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराने के हमारी प्रतिबद्धता का सुबूत हैं। वर्ष 2005 में राष्ट्रीय ग्रामीण स्वास्थ्य मिशन शुरू किया गया था, जिसने देश के ग्रामीण इलाकों में बुनियादी स्वास्थ्य देखभाल को नई रफ्तार दी है। 

ये दोनों परियोजनाएं बुनियादी तौर पर हमारे देश और हमारी जनता के विकास से जुड़ी हुई हैं। मैं आज आपको यह भरोसा भी दिलाना चाहता हूं कि हमारी सरकार आप और आपके बच्चों का भविष्य बेहतर और सुरक्षित बनाने के लिए हर मुमकिन कोशिश करती रहेगी। 

इन्हीं शब्दों के साथ, मैं आप सबका शुक्रिया अदा करता हूं और राष्ट्रीय विकास के कामों में सफलता प्राप्त करने के लिए हरियाणा के लोगों को बधाई देता हूं। 

जय हिन्द!” 
***
वि.कासोटिया/एकेपी/डीसी-31