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Monday, September 14, 2020

हिन्दी दिवस पर प्रदेशवासियों को बधाई एवं शुभकामनाएं

 मुख्यमंत्री ने हिन्दी के प्रयोग और इसके सम्मान बढ़ाने पर ज़ोर दिया  
चंडीगढ़:14 सितम्बर 2020: (हरियाणा स्क्रीन ब्यूरो)::
हरियाणा के मुख्यमंत्री श्री मनोहर लाल ने हिन्दी दिवस पर प्रदेशवासियों को बधाई एवं शुभकामनाएं देते हुए कहा कि आज के दिन हमें हिन्दी के प्रयोग और इसके सम्मान को बढ़ाने का संकल्प लेना चाहिए।
          हिन्दी दिवस के अवसर पर आज यहां जारी एक संदेश में मुख्यमंत्री ने कहा कि हिन्दी भाषा भावों की अभिव्यक्ति का साधन ही नहीं है, बल्कि यह हमारी मातृभूमि के समृद्ध विकास का स्मरण भी कराती है।
          मुख्यमंत्री ने कहा कि आज ही के दिन वर्ष 1949 में संविधान सभा ने देवनागरी लिपि में हिन्दी को देश की राजभाषा के रूप में स्वीकार किया था। उन्होंने कहा कि तब से लेकर आज तक अन्तर्राष्ट्रीय मंचों पर भी हिन्दी व्यापक रूप में स्वीकार की जा रही है। इस दिशा में पूर्व प्रधानमंत्री स्व0 श्री अटल बिहारी वाजपेयी के प्रयास अग्रणी रहे हैं। संयुक्त राष्ट्र महासभा में हिन्दी में उनका सम्बोधन आज भी स्मरण किया जाता है।
मुख्यमंत्री मनोहरलाल ने कहा इस मकसद का संकल्प भी लो 

Monday, May 12, 2014

भगाणा कांड के पीड़ितों ने की इंसाफ की मांग

 Mon, May 12, 2014 at 9:47 AM
दोषियों को सख्त सजा दी जाए
अनिता भारती
नई दिल्ली, 11 मई। हरियाणा के भगाणा गांव में सामूहिक बलात्कार की शिकार हुई चार नाबालिगों के हक में न्याय की मांग के समर्थन में आज पीड़ितों के साथ भारी संख्या में दिल्ली के सामाजिक कार्यकता, बुद्धिजीवी और विद्यार्थी भी जुटे।  यहां दिल्ली में पंत मार्ग पर स्थित हरियाणा के मुख्यमंत्री आवास पर धरना देते हुए आंदोलनकारियों ने पीड़ितों के प्रति हरियाणा सरकार के रवैए की तीखी आलोचना की और कहा कि ऐसा लगता है कि हरियाणा सरकार सामंती उत्पीड़नकर्ताओं के पक्ष में खड़ी हो गई है और दलितों-पीड़ितों की आवाज को जानबूझ कर दफन किया जा रहा है। बड़े पैमाने पर जुटे लोगों ने यहां दिल्ली में सरकार और प्रशासन से यह मांग की कि पीड़ितों पर जुल्म ढाने वाले  और फास्ट ट्रैक अदालतों का गठन कर पीड़ितों को जल्द से जल्द इंसाफ दिलाई जाए।
आंदोलनकारी हरियाणा के मुख्यमंत्री भूपिंदर सिंह हुडा से मिलना चाहते थे, लेकिन भारी संख्या में पुलिस बल ने बैरिकेड लगाकर उन्हें रोक दिया। इसके बाद आंदोलनकारियों ने अपने विरोध प्रदर्शन के दौरान पुलिस के कई बैरिकेड तोड़ डाले और आक्रोश से भर कर वहीं हरियाणा सरकार और पुलिस प्रशासन के खिलाफ नारे लगाए। जब आंदोलनकारियों का गुस्सा नहीं थमा तो उनमें से दस लोगों के प्रतिनिधिमंडल को हरियाणा के मुख्यमंत्री के राजनीतिक सचिव सुरेंद्र दहिया से बातचीत के लिए बुलाया, लेकिन उन्हें कार्रवाई का भरोसा नहीं दिया। इस पर आंदोलनकारियों का गुस्सा और क्षोभ और बढ़ गया तब फिर दुबारा सात लोगों के प्रतिनिधिमंडल को बुलाया गया, जिसने सुरेंद्र दहिया के सामने जोरदार तरीके से हरियाणा और खासकर भगाणा में दलितों पर होने वाले अत्याचारों का ब्योरा दिया और जल्द कानूनी कार्रवाई करने के साथ-साथ पीड़ितों को मुआवजा देने और उनके पुनर्वास की मांग की। इसके बाद राजनीतिक सचिव की ओर से अगले बहत्तर घंटों के भीतर मांगों पर कार्रवाई करने का आश्वासन दिया गया।   
विरोध प्रदर्शन के दौरान वक्ताओं ने भगाणा में पीड़ित किशोरियों के सामूहिक बलात्कार में शामिल अपराधियों को संरक्षण देने वाले गांव के सरपंच और उसके साथियों को भी तत्काल गिरफ्तार करने की मांग की। भगाणा कांड सघर्ष समिति के प्रवक्ता जगदीश काजला ने कहा कि भगाणा की इन पीड़ित बच्चियों और परिवारों के साथ हुई यह घटना हरियाणा में दबंगों के आतंक की एक छोटी बानगी है। काजला ने कहा कि जिस गांव में दबंगों ने दलित परिवारों का सम्मान से जीना असंभव कर दिया है, वे वहां लौटना चाहते, इसलिए उन्हें वहां से अलग बसाने की व्यवस्था की जाए। बलात्कार पीड़ित एक बच्ची की मां सोना ने कहा कि हरियाणा में हमें इंसाफ नहीं मिला तो हम दिल्ली के जंतर मंतर पर आए कि यहां हमारी आवाज सुनी जाएगी, लेकिन अब एक महीने होने जा रहा है, आज तक केंद्र सरकार या दिल्ली या फिर हरियाणा के प्रशासन या किसी नेता ने हमारा दुख समझने और यहां तक बात करने तक की भी कोशिश नहीं की। सोना ने आगे कहा कि हम देश और प्रशासन से पूछना चाहते हैं कि क्या दलितों का कोई सम्मान नहीं होता, उनकी बेटियां क्या बेटी नहीं होती हैं?
भगाणा गांव की एक वृद्ध महिलाए गुड्डी ने कहा कि जिन बच्चियों के साथ बलात्कार हुआ, उनके सम्मान और गरिमा के खिलाफ अपराध हुआ, वे खुद दिल्ली के जंतर मंतर पर न्याय की आस में बैठी है, लेकिन केंद्र या राज्य सरकार या किसी भी प्रशासन को इनकी बात सुनने की जरूरत महसूस नहीं हुई। विरोध प्रदर्शन के आखिर में भगाणा कांड संघर्ष समिति ने कहा है कि अगर इस मामले में पीड़ितों के साथ न्याय नहीं हुआ, तो हम देशव्यापी आंदोलन छेड़ने के लिए तैयार हैं।
भगाणा कांड संघर्ष समिति की ओर से
जगदीश काजला
09812034593
अनिता भारती
09899700767

Friday, January 3, 2014

हरियाणा के जिला जींद में होगा ठोस एवं तरल कूडा-कर्कट का प्रबंधन

02-जनवरी-2014 09:51 IST
जींद के सभी गांवों में लगेंगे अलग-अलग प्रौजेक्ट
Rajiv Ratan IAS DC Jind
चण्डीगढ़, 2 जनवरी 2014:
हरियाणा के जिला जींद में ठोस एवं तरल कूडा-कर्कट के प्रबंधन के लिए जींद के सभी गांवों में अलग-अलग प्रौजेक्ट लगाए जाएंगे। इसके लिए एक कार्य योजना तैयार कर कार्यवाही शुरू कर दी गई है। इस कार्ययोजना को अमलीजामा पहनाने की जिम्मेवारी पंचायती राज विभाग को सौंपी गई है। यह जानकारी देते हुए एक प्रवक्ता ने बताया कि जिला जींद के सभी गांवो में ठोस एंव तरल कूडा कर्कट के प्रबंधन के लिए गांव वार अलग-अलग प्रौजेक्ट बनाए जाएंगे। उन्होंने बताया कि इस कार्य योजना के तहत 25 सॉलिड लिक्विड वेस्ट मैनेजमेंट तथा दस सॉलिड वेस्ट मैनेजमैंट प्रौजेक्ट स्थापित करवाने के लिए लगभग 2 करोड़ 28 लाख रूपए की राशि पंचायती विभाग को उपलब्ध करवा दी गई है। उन्होंने बताया कि गांव में गंदे पानी की निकासी करने के लिए सोखते गढ्ढे ,कम लागत में बनने वाली नालियों तथा गंदे पानी को साफ करके पुनः प्रयोग में लाने के लिए थ्री पोंड सिस्टम जैसे कार्य करवाए जाएंगे। उन्होंने बताया कि गांव में ठोस व तरल कूडा-कर्कट के उचित प्रबंधन के लिए 150 परिवारों वाले गांवों 7 लाख रूपए तक की राशि खर्च की जाएगी। इसी प्रकार से तीन सौ परिवार वाले गांव पर 12 लाख रूपए ,450 परिवार वाले गांव पर 15 लाख रूपए, एवं 450 से उपर परिवार वाले गांव पर 20 लाख रूपए तक की राशि खर्च की जाएगी। उन्होंने बताया कि निर्मल भारत अभियान के तहत इस कार्य योजना को पूरा करवाया जाएगा। इस अभियान के तहत आंगनवाड़ी केन्द्रों, स्कूलों व सार्वजनिक स्थलों पर शौचालयों का निर्माण कार्य भी करवाया जा रहा है। आंगनवाड़ी केन्द्रों में शौचालय निर्माण के लिए 37 लाख 84 हजार रूपए की राशि पंचायती विभाग को जारी कर दी गई है। इस राशि से जिला के 473 आंगनवाड़ी केन्द्रों में शौचालय की सुविधा उपलब्ध हो जाएगी। इसी प्रकार से स्कूलों में शौचालय निर्माण के लिए दो लाख 45 हजार रूपए की राशि जारी की गई है। स्कूलों में शौचालयों का निर्माण कार्य भी पंचायती राज विभाग द्वारा करवाया जाएगा। जारी की गई राशि से 7 स्कूलों में शौचालयों का निर्माण करवाया जाएगा। निर्मल भारत अभियान के तहत निजी शौचालय बनवाने के लिए 3200 रूपए की राशि को बढ़ाकर दस हजार रूपए कर दिया गया है। इन दस हजार रूपए की राशि में से 4600 निर्मल भारत अभियान से तथा 4500 रूपए की राशि मनरेगा योजना के तहत दी जा रही है। निजी शौचालय बनाने के लिए ग्राम पंचायतों को अधिकृत किया गया है।

Thursday, August 23, 2012

देश की एकता-अखंडता खतरे में ?//राजीव गुप्ता

 भारत-विभाजन जैसी वीभत्स त्रासदी से सबक क्यों नहीं?
                                                                                                                              तस्वीर जनोक्ति से साभार 
भारत इस समय किसी बड़ी संभावित साम्प्रदायिक-घटना रूपी ज्वालामुखी के मुहाने पर खड़ा हुआ प्रतीत हो रहा है. देश की एकता-अखंडता खतरे में पड़ती हुई नजर आ रही है. देश की संसद में भी आतंरिक सुरक्षा को लेकर तथा सरकार की विश्वसनीयता और उसकी कार्यप्रणाली पर प्रश्नचिंह खड़े किये जा रहे है. सांसदों की चीख-पुकार से सरकार की अब जाकर नीद खुली है. सरकार ने आनन्-फानन में देश में मचे अब तक के तांडव को पाकिस्तान की करतूत बताकर अपना पल्ला झड़ने की कोशिश करते हुए दोषियों के खिलाफ कार्यवाही करने के नाम पर भारत के गृहमंत्री ने पाकिस्तान के गृहमंत्री से रविवार को बात कर एक रस्म अदायगी मात्र कर दी और प्रति उत्तर में पाकिस्तान ने अपना पल्ला झाड़ते हुए भारत को आरोप-प्रत्यारोप का खेल खेलना बंद करने की नसीहत देते हुए यहाँ तक कह दिया कि भारत के लिए सही यह होगा कि वह अपने आंतरिक मुद्दों पर पर ध्यान दे और उन पर काबू पाने की कोशिश करे. अब सरकार लाख तर्क दे ले कि इन घटनाओ के पीछे पाकिस्तान का हाथ है, परन्तु सरकार द्वारा समय पर त्वरित कार्यवाही न करने के कारण जनता उनके इन तर्कों से संतुष्ट नहीं हो रही है इसलिए अब प्रश्न चिन्ह सरकार की नियत पर खड़ा हो गया है क्योंकि असम में 20 जुलाईं से शुरू हुईं सांप्रादायिक हिंसा जिसमे समय रहते तरुण गोगोईं सरकार ने कोई बचाव-कदम नहीं उठाए मात्र अपनी राजनैतिक नफ़ा-नुक्सान के हिसाब - किताब में ही लगी रही. परिणामतः वहां भयंकर नर-संहार हुआ और वहा के लाखो स्थानीय निवासियों ने अपना घर-बार छोड़कर राहत शिवरों में रहने के लिए मजबूर हो गए.
असम के विषय में यह बात जग-जाहिर है कि असम और बंग्लादेश के मध्य की 270 किलोमीटर लम्बी सीमा में से लगभग 50 किलोमीटर तक की सीमा बिलकुल खुली है जहा से अवैध घुसपैठ  होती है और इन्ही अवैध घुसपैठों के चलते लम्बे समय से वहा की स्थानीय जनसंख्या का अनुपात लगातार नीचे गिरता जा रहा है. यह भी सर्वविदित है कि असम में हुई हिंसा हिन्दू बनाम मुस्लिम न होकर भारतीय बनाम बंग्लादेशी घुसपैठ का है. जिसकी आवाज़ कुछ दिन पहले भाजपा के वरिष्ठ नेता लालकृष्ण आडवाणी ने भी बुलंद की थी और यह सरकार से मांग की थी कि असम से पलायन कर गए लोगों की स्थिति कश्मीरी पंडितों जैसी नहीं होनी चाहिए . ध्यान देने योग्य है कि 1985 में तत्कालीन प्राधानमंत्री राजीव गांधी के समय असम में यह समझौता हुआ था कि बंगलादेशी घुसपैठियों की पहचान कर उन्हें वापस भेजा जाय परन्तु इस विषय के राजनीतिकरण के चलते  दुर्भाग्य से इस समझौते के प्रावधानों को कभी भी गम्भीरता से लागू नहीं किया गया. परिणामतः असम में 20 जुलाईं से उठी चिंगारी ने आज पूरे देश को अपनी चपेट में लिया है.
दक्षिण भारत के दो प्रमुख राज्यों आंध्र प्रदेश और कर्नाटक के साथ-साथ  महाराष्ट्र से उत्तर-पूर्व के हजारो छात्रों का वहा से पलायन हो रहा है और अब यह सिलसिला भारत के दूसरो शहरो में भी शुरू हो जायेगा इस संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता है. प्रधानमंत्री संसद में यह लाख तर्क देते रहे कि हर देशवासी की तरह पूर्वोत्तर के लोगों को देश के किसी भी भाग में रहने, पढ़ाईं करने और जीविकोपार्जन करने का अधिकार है. पर सच्चाई उनके इस तर्क से अब कोसों दूर हो चुकी है. देश की जनता को उनके तर्क पर अब विश्वास नहीं हो रहा है. सरकार के सामने अब मूल समस्या यही है कि वो जनता को विश्वास कैसे दिलाये. भारतवर्ष सदियों से अपने को विभिन्नता में एकता वाला देश मानता आया है क्योंकि यहाँ सदियों से अनेक मत-पन्थो के अनुयायी रहते आये है. परन्तु समस्या विकराल रूप तब धारण कर लेती है जब एक विशेष समुदाय के लोग देश की शांतिपूर्ण सह-अस्तित्व में अपना विश्वास करना छोड़ कर भारत की एकता - अखंडता पर प्रहार करने लग जाते है और वहा के दूसरे समुदाय की धार्मिक तथा राष्ट्रभक्ति की भावनाओ को कुचलने का प्रयास करने लग जाते है क्योंकि हर साम्प्रदायिक-घटना किसी समुदाय द्वारा दूसरे समुदाय की भावनाओ के आहत करने से ही उपजती है. अभी हाल में ही दिल्ली के सुभाष पार्क , मुम्बई के आज़ाद मैदान, कोसीकला, बरेली जैसे शहरो में हुई घटनाये इसका प्रत्यक्ष उदाहरण है.   

मुम्बई में बने शहीदों के स्मारकों को तोडा गया, मीडिया की गाड़ियों को आग के हवाले कर दिया गया. पुलिस पर हमला किया गया जिसमे गंभीर रूप से घायल हो गए. इतना ही नहीं यह आग रांची, बैंगलोर जैसे अनेक शहरों तक जा पहुची यहाँ तक की उत्तर प्रदेश के लखनऊ, इलाहाबाद जैसे कई शहर भी इस आग में झुलस गए परिणामतः प्रशासन द्वारा वहा कर्फ्यू लगा दिया गया. असल में अब समस्या यह है नहीं किस राज्य में किस समुदाय द्वारा सांप्रदायिक - हिंसा की जा रही है अथवा उन्हें ऐसा करने के लिए कौन उकसा रहा है जिससे उन्हें ऐसा करने का बढ़ावा मिल रहा है अपितु अब देश के सम्मुख विचारणीय  प्रश्न यह है कि इतिहास अपने को दोहराना चाह रहा है क्या ? सरकार भारत-विभाजन जैसी वीभत्स त्रासदी वाले इतिहास से सबक क्यों नहीं ले रही है ?  क्या सरकार खिलाफत-आन्दोलन और अलास्का की घटना की प्रतिक्रिया स्वरुप भारत में हुई साम्प्रदयिक-घटना जैसी किसी बड़ी घटना का इंतज़ार कर रही है ? यह बात सरकार को ध्यान रखनी चाहिए कि जो देश अपने इतिहास से सबक नहीं लिया करता उसका भूगोल बदल जाया करता है इस बात का प्रमाण भारत का इतिहास है. एक समुदाय द्वारा देश में मचाये जा रहे उत्पात पर निष्पक्ष कही जाने वाली मीडिया की अनदेखी और सरकार की चुप्पी से भारत के बहुसंख्यको में अभी काफी मौन-रोष पनप रहा है इस बात का सरकार और मीडिया को ध्यान रखना चाहिए और समय रहते इस समस्या को नियंत्रण में करने हेतु त्वरित कार्यवाही करना चाहिए. 
लेखक:राजीव गुप्ता
यह एक कटु सत्य है कि विभिन्न समुदायों के बीच शांति एवं सौहार्द स्थापित करने की राह में सांप्रदायिक दंगे एक बहुत बड़ा रोड़ा बन कर उभरते है और साथ ही मानवता पर ऐसा गहरा घाव छोड़ जाते है जिससे उबरने में मानव को कई - कई वर्ष तक लग जाते है. ऐसे में समुदायों के बीच उत्पन्न तनावग्रस्त स्थिति में किसी भी देश की प्रगति कदापि संभव नहीं है. आम - जन को भी देश की एकता – अखंडता और पारस्परिक सौहार्द बनाये रखने के लिए ऐसी सभी देशद्रोही ताकतों को बढ़ावा न देकर अपनी सहनशीलता और धैर्य का परिचय देश के विकास में अपना सहयोग करना चाहिए. आज समुदायों के बीच गलत विभाजन रेखा विकसित  की जा रही है. विदेशी ताकतों की रूचि के कारण स्थिति और बिगड़ती जा रही  है जो भारत की एकता को बनाये रखने में बाधक है. अतः अब समय आ गया है देश भविष्य में ऐसी सांप्रदायिक घटनाये न घटे इसके लिए जनता स्वयं प्रतिबद्ध हो.
-    लेखक:राजीव गुप्ता, 9811558925


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